21 जनवरी 2024 को नगराम फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य, हमारे प्यारे जावेद भाई का दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया। आज, एक साल बाद, उनकी यादें और उनका योगदान हमारे दिलों में ताजे हैं। इस एक साल के सफर ने हमें उनके जीवन के महत्व और उनकी सेवा की सच्चाई को और करीब से समझने का अवसर दिया।
जावेद भाई की ज़िन्दगी और उनकी क़ुर्बानीजावेद भाई की ज़िन्दगी इंसानियत, सेवा और क़ुर्बानी की मिसाल थी। वह हमेशा ग़रीबों की मदद के लिए आगे बढ़ते थे। नगराम में उनकी कई योजनाओं ने हजारों ज़रूरतमंदों की मदद की। ग़रीबों का ऑपरेशन करवाना, चश्मे और कम्बल वितरण करना, और लड़कियों की शादी में मदद करना—यह सब उनकी बे-लौस सेवा की मिसालें हैं। उनका यकीन था कि समाज की असली ताकत उसके लोगों में है और समाज के सबसे कमजोर वर्ग की मदद करना ही इंसानियत की असल हकीकत है।
उनका काम : नगराम फाउंडेशन और समाज की सेवा
जावेद भाई का सबसे बड़ा योगदान नगराम फाउंडेशन में था, जिसे उन्होंने 2014 में एक सक्रिय सदस्य के रूप में शुरू किया था। यह संस्थान ग़रीबों की मदद करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, और जावेद भाई ने इसके उद्देश्य को अपनी ज़िन्दगी का मिशन बना लिया था। उन्होंने इस संगठन के ज़रिए तालीम, सेहत की सेवाएँ, और माली मदद प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए। उनका ख़्वाब था कि नगराम में अच्छे स्कूल खोले जाएं, ताकि ग़रीब बच्चों को बेहतर तालीम मिल सके। यह ख़्वाब अभी अधूरा रह गया है, लेकिन उनका काम और उनकी मेहनत हमेशा याद की जाएगी।

उनकी इंसानियत और सेवा भावना
जावेद भाई की ज़िन्दगी हमें यह सिखाती है कि सच्ची सेवा वही है जो हम बिना किसी स्वार्थ के करते हैं। उन्होंने कभी भी किसी भी मदद के लिए अपना नाम नहीं चाहा, न ही किसी इनाम की उम्मीद की। उनका मकसद केवल यह था कि वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। एक दिन जब उन्होंने एक ग़रीब बच्चे को सड़क पर भटकते हुए देखा, तो उन्होंने तुरंत उस बच्चे की मदद की। उन्होंने न केवल उस बच्चे को खाना और गरम कपड़े दिए, बल्कि उसके परिवार को भी सहारा दिया। यह छोटी सी घटना उनके दिल में सच्ची सेवा का जज़्बा पैदा करने का कारण बनी।
नगराम और आसपास के इलाकों में शोक की लहर
जावेद भाई का इंतकाल नगराम और आसपास के इलाकों में गहरा शोक छोड़ गया। उनकी कमी महसूस की जा रही है, और उनके द्वारा किए गए काम का असर अब भी समाज में देखा जा सकता है। उनका योगदान न केवल नगराम फाउंडेशन तक सीमित था, बल्कि उन्होंने पूरे इलाके में अपनी सेवा से एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ा। उनका मार्गदर्शन और हौसला आज भी हमें प्रेरित करता है कि हम भी समाज की सेवा में अपने फ़र्ज़ निभाएं।
बरसी की मजलिस और उलेमाओं का योगदान
जावेद भाई के इंतकाल के बाद उनकी बरसी की मजलिस में कई बड़े उलमा और धार्मिक हस्तियाँ तशरीफ़ लाईं। मौलाना अली अब्बास खान साहब ने उनकी बरसी के मौके पर शिरकत की, जबकि उनके चालीसवें के मजलिस में हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद सफी हैदर ज़ैदी और मौलाना कल्बे रुशैद रिज़वी के अलावा, मौलाना गुलज़ार जाफरी और मौलाना आजिम बाकिरी जैसे प्रसिद्ध उलेमा ने भी इसाले सवाब की मजलिसों को खिताब किया। इन उलेमाओं के प्रभावशाली भाषणों ने जावेद भाई की यादों को ताज़ा किया और उनके नेक कार्यों की मिसाल दी।एक साल बाद: उनका योगदान हमेशा ज़िंदा रहेगाजावेद भाई का इंतकाल एक व्यक्तिगत और सामूहिक नुक़सान था। हालाँकि वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम और उनके द्वारा की गई क़ुर्बानियाँ हमेशा हमें हौसला देती रहेंगी। उनकी ज़िन्दगी एक मिसाल है कि एक शख़्स किस तरह समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, और उनका ख़्वाब आज भी हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगा।उनके बेटे शावेज़,साहिल और शाजर वालिद साहब के नक्शे कदम पर चलते हुए उनके सपनों को साकार करने में लगे है।
“एक साल के इस सफर ने यह साबित किया कि जावेद भाई ने अपनी ज़िन्दगी को समाज की सेवा में लगाया, और उनका काम हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगा। उनकी मिसाल हमें यह सिखाती है कि अगर हम इमानदारी और क़ुर्बानी से काम करें, तो हम समाज में वाक़ई बदलाव ला सकते हैं।“