नगराम टाइम्स ब्यूरो
नगराम, लखनऊ : नगराम के प्रसिद्ध इमामबाड़ा वजाहत हुसैन रिज़वी (सैयद वाड़ा) में आज सालाना मजलिस-ए-अज़ा का बेहद पुरअसर आयोजन किया गया। यह मजलिस मरहूमीन नगराम के इसाल-ए-सवाब के लिए रखी गई थी, जिसमें दूर-दराज से आए मोमेनीन ने शिरकत कर अजादारी में हिस्सा लिया।

मौलाना अरशद हुसैन मूसवी का रुहानी और असरदार खिताब
इस रूहानी महफ़िल में हुज्जतुल इस्लाम आली जनाब मौलाना सैयद अरशद हुसैन मूसवी साहब ने खिताब किया। उन्होंने अपनी तकरीर में अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की अजमत, हुसैनी पैग़ाम और मजलिस की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। उनके बयान ने न सिर्फ अजादारों के दिलों को गम-ए-हुसैन से सरशार कर दिया, बल्कि उन्हें दीन-ए-इस्लाम के असल उसूलों को अपनाने की प्रेरणा भी दी।मौलाना ने कर्बला के वाक़ियात को बयान करते हुए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी और उनके वफादार साथियों की अज़मत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,”मजलिस-ए-अज़ा सिर्फ ग़म-ए-हुसैन को ताज़ा करने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी इमानी ताक़त को बढ़ाने, सच्चाई और इंसाफ़ को फैलाने का भी माध्यम है।”उन्होंने मोमेनीन को आपसी इत्तेहाद, भाईचारे और इस्लाम की तालीमात पर अमल करने की ताकीद की। उनका बयान इतना असरदार था कि मजलिस में बैठे अजादारों की आंखें नम हो गईं और माहौल बेहद गमगीन हो गया।
सोज़, पेशख्वानी और नव्हों ने बढ़ाया मजलिस का असर
इस मौके पर मशहूर मीर गुलाब ने सोज़ख्वानी कर माहौल को और ज्यादा पुरअसर बना दिया। वहीं, आफताब नगरामी,साहिल और शावेज़ ने पेशख्वानी और नव्हा पढ़कर अजादारों के जज़्बात को और गहराई से महसूस कराया। उनके दर्द भरे नव्हों ने मजलिस में बैठे मोमेनीन को कर्बला की यादों में डुबो दिया, जिससे हर आंख से अश्कों का सैलाब बह निकला।

LIVE प्रसारण से जुड़ा पूरी दुनिया का अकीदतमंद तबका
कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ, जिसमें नगराम और आसपास के इलाकों से भारी संख्या में मोमेनीन ने शिरकत की। मजलिस में हर आंख नम और हर दिल गमगीन नजर आया। इस मौके पर कर्बला की शहादत को याद कर अजादारों ने मातम किया और हुसैनी पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में उतारने का संकल्प लिया।इस आयोजन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए अंजुमन अब्बासिया नगराम, लखनऊ द्वारा इसका सीधा प्रसारण (LIVE) भी किया गया, जिससे दूर-दराज के अजादार भी इस बरकत में शामिल हो सके।

मरहूमीन के लिए फातिहा और सलाम-ए-आखिर के साथ मजलिस संपन्न
मजलिस के आखिर में मरहूमीन के इसाल-ए-सवाब के लिए फातिहा पढ़ी गई और सभी मोमेनीन ने मिलकर दुआएं मांगी। सलाम-ए-आखिर के साथ यह रूहानी मजलिस संपन्न हुई, लेकिन कर्बला की यादें और हुसैनी पैग़ाम मोमेनीन के दिलों में हमेशा के लिए बसा रहेगा।